संयुक्त मोर्चा के फैसले से युवा होने लगे उग्र, संसद मार्च का दोबारा फैसला लेने की तैयारी

कुंडली ब्रेकिंग न्यूज़ राजनीति सोनीपत

सोनीपत। किसान आंदोलन में संयुक्त मोर्चा के फैसलों से युवा उग्र होने लगे हैं और वह अपने ही नेताओं के खिलाफ खड़े होने शुरू हो गए है। संसद मार्च रद्द करने के कारण युवाओं में सबसे ज्यादा अविश्वास बढ़ा है और आंदोलन की जान समझे जाने वाले युवा उस फैसले के विरोध में हंगामा तक करने लगे है। जिसको देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने संसद मार्च का दोबारा फैसला लेने की तैयारी कर दी है, लेकिन इसपर अंतिम फैसला एक सप्ताह के अंदर लिया जाएगा। वहीं आंदोलन के लंबा चलने के कारण पहले ही राशन की व्यवस्था की जा रही है और गांवों से गेहूं एकत्र करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। गांवों से गेहूं एकत्र करके बॉर्डर पर लाया जाएगा, जिससे राशन की किल्लत नहीं हो सके।
कृषि कानून रद्द कराने की मांग को लेकर किसान 150 दिन से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए है। किसानों व सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत जरूर हुई, लेकिन उनमें कोई हल नहीं निकलने के बाद से सरकार व किसानों के बीच बातचीत बंद पड़ी है। इसको देखते हुए ही मई के पहले पंद्रह दिन में संसद तक पैदल मार्च का एलान संयुक्त किसान मोर्चा ने किया था। संसद मार्च को अचानक ही रद्द करने की घोषणा की गई, जिसपर किसान मोर्चा के अंदर ही कलह शुरू हो गई थी। जहां पंजाब के 29 संगठन संसद मार्च रद्द करने के पक्ष में खड़े थे, वहीं हरियाणा के किसान संगठन संसद मार्च चाहते थे। संयुक्त किसान मोर्चा के लिए संगठनों के नेताओं को समझाना आसान था, लेकिन किसान मोर्चा के इस फैसले से युवा उग्र होने लगे है। युवाओं ने संसद मार्च रद्द करने के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का विरोध करते हुए खुलकर हंगामा शुरू कर दिया है और इसको लेकर ही संयुक्त किसान मोर्चा व खाप प्रतिनिधियों को शुक्रवार शाम को कुंडली बॉर्डर पर बैठक तक नहीं करने दी गई। किसान आंदोलन के लिए युवाओं को सबसे अहम माना जाता है और युवाओं के सहारे ही पंजाब से किसान दिल्ली के बॉर्डर तक पहुंचे हैं। ऐसे में किसान नेता अब युवाओं को नाराज नहीं करना चाहते हैं और इसलिए ही संसद मार्च का दोबारा फैसला लेने की तैयारी हो गई है। हालांकि इसको लेकर अगले सप्ताह संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी और उसमें इसपर आखिरी फैसला लिया जाएगा। यह जरूर साफ है कि अब मोर्चा को आंदोलन में कोई बड़ा फैसला लेना पड़ेगा। मोर्चा के सदस्य बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि संसद मार्च को लेकर बातचीत चल रही है और इसपर अगले सप्ताह होने वाली बैठक में फैसला लिया जाएगा। उनके अनुसार युवा चाहते हैं कि संसद मार्च किया जाए तो उसको देखते हुए कोई फैसला लिया जाएगा।

गांवों से गेहूं एकत्र करने का अभियान चलेगा, बॉर्डर पर लेकर आएंगे
जिस तरह से आंदोलन लंबा हो रहा है और किसानों व सरकार के बीच बातचीत भी नहीं हो रही है। उसको देखते हुए लग रहा है कि यह अभी काफी लंबा आंदोलन हो सकता है। इसलिए ही किसान नेताओं ने गांवों से गेहूं एकत्र करने के लिए अभियान शुरू कर दिया है और गांवों से गहूं एकत्र करके बॉर्डर पर लाया जाएगा। भाकियू हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि गांवों में किसानों से आंदोलन के लिए गेहूं देने की अपील की गई है। उनपर किसी तरह का दबाव नहीं है कि उनको गेहूं देना है या इतना देना है। कोई खुद गेहूं देना चाहे तो वह दे सकता है। इस तरह से बॉर्डर पर राशन की कमी नहीं होगी।

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