राकेश टिकैत को लेकर मोर्चा में तकरार, किसान नेताओं की सोच समझकर बयान देने की नसीहत

कुंडली राजनीति सोनीपत

सोनीपत। किसान आंदोलन को बिखरने पर दोबारा से खड़ा करने वाले भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के बयान को लेकर लगातार तकरार बढ़ती जा रही है। जहां पहले उनके फसलों को जलाने का बयान देने पर किसानों ने खेतों में ट्रैक्टर चलाना शुरू कर दिया और किसान नेताओं को उन्हें समझाने के लिए अपील के साथ ही बैठक करनी पड़ रही है। वहीं अब उनके संसद का घेराव करने के बयान पर भी तकरार शुरू हो गई है। किसान नेताओं ने उनको सोच समझकर बयान देने की नसीहत दी है। किसान नेताओं का मानना है कि राकेश टिकैत के हर बयान पर पूरी दुनिया की नजर रहती है और उनके बयान से निकलने वाला संदेश पूरी दुनिया में जाता है। इसलिए उनको ऐसे बयान देने से बचना चाहिए और उन्होंने इसे उनका निजी बयान बताया।

गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में बवाल के बाद टूटते आंदोलन को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं ने दोबारा से खड़ा किया था। उसके बाद से राकेश टिकैत ही किसानों के सबसे बड़े नेता बने हुए हैं। उनको उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि हरियाणा, राजस्थान समेत अन्य सभी प्रदेशों में सबसे ज्यादा तवज्जो मिल रही है। लेकिन उनके बयान संयुक्त किसान मोर्चा को परेशान कर रहे हैं और उनके बयानों को लेकर तकरार बढ़ती जा रही है। राकेश टिकैत ने सबसे पहले देशभर में होने वाले चक्का जाम को अचानक ही यूपी व उत्तराखंड में करने से मना कर दिया था। जिस पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने नाराजगी भी जताई थी। उसके बाद राकेश टिकैत ने किसानों के फसल जलाने का बयान दिया तो किसानों ने खेतों में खड़ी फसल की जुताई करके नष्ट करना शुरू कर दिया। जिससे किसान नेताओं को फसल नष्ट नहीं करने की अपील करनी पड़ रही है और इसके लिए बैठक करके किसानों को जागरूक करना पड़ रहा है। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब राकेश टिकैत ने 40 लाख ट्रैक्टर लेकर संसद का घेराव करने का बयान दिया है और इस पर फिर तकरार हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और राकेश टिकैत को इस तरह के बयान नहीं देने की नसीहत तक दी है। उनका मानना है कि इतने बड़े किसान नेता कोई बयान देते हैं तो उस पर अमल भी होना चाहिए। इस तरह से केवल बयान देने से गलत संदेश जाता है और उनके बयान को इस समय काफी अहम माना जाता है। किसान नेताओं ने यह भी साफ कर दिया कि यह उनका निजी बयान है। उन्होंने कहा कि इस तरह से कोई भी नेता बयान देता है तो वह उसका निजी बयान होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा का बयान उसे ही माना जाएगा जो बैठक के बाद जारी किया जाएगा।

Source

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *